ड्यूमा क्या है : duma kya hai

ड्यूमा क्या है : duma kya hai

ड्यूमा क्या है : duma kya hai – ड्यूमा,अधिकतर लोग इसे स्टेट ड्यूमा के नाम से भी जानते हैं। यह रूस की संघीय सभा का एक निचला सदन है।  तथा यह रूस सांसद के 2 कक्षाओं में से एक है। दूसरे कक्षा का नाम फाउंडेशन काउंसिल है।  ड्यूमा को एक विधाई निकाय माना जाता है । जो कि कानून को पारित करने तथा बजट को मंजूरी देने एवं सरकार के काम की देखभाल करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 

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ड्यूमा का इतिहास ( History of the Duma )

ड्यूमा की स्थापना सन 1905 में हुई थी । तथा यह 1905 मे हुई रूसी क्रांति के परिणाम स्वरूप हुई थी। रूस के इतिहास में पहली बार हुआ था कि यहां निर्वाचित राष्ट्रीय सांसद बनी थी। 1996 दीमार्को जार निकोलस 2 द्वारा भंग करा दिया गया था। मगर 1917 मे फरवरी मे दोबारा हुई क्रांति के बाद इसे बहाल कर दिया गया था 1917 के मार्च महीने में ड्यूमा अंतिम रूसी सरकार की स्थापना करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

सोवियत युग के समय पर ड्यूमा को सर्वोच्च सोवियत द्वारा स्थापित क्या गया था।  बता दें कि सर्वोच्च सोवियत एक सदनीय सांसद थी। 1993 में जब  सोवियत संघ का पतन हुआ इसके बाद ड्यूमा को नए रूसी संघ के हिस्से के रूप में बहाल कर दिया गया था। 

ड्यूमा की संरचना ( composition of the Duma )

जानकारी के लिए बता दें कि ड्यूमा 450 प्रतिनियुक्तियों से बना है। जो कि 5 साल की अवधि के रूप में चुने जाते हैं।

जिसमें से आधे प्रतिनिधि एक अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुने जाते हैं। जबकि अन्य चुने जाने वाले सारे सदस्य रूस के निर्वाचन क्षेत्र प्रणाली के माध्यम से चुने जाते हैं।

बता दें कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली छोटे दलों के लिए अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व की अनुमति प्रदान करती है एवं जो एक सदस्य निर्वाचन क्षेत्र प्रणाली होती है वह बड़े दलों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व को प्रदान करती है।

ड्यूमा का नेतृत्व स्पीकर के द्वारा किया जाता है जिसे डेप्युटी के द्वारा चुना जाता है। स्पीकर का कार्य ड्यूमा की सत्रों की अध्यक्षता करना तथा उसके सभी कामों के देखरेख करना एवं उनकी जिम्मेदारियां लेना होता है।

ड्यूमा की शक्तियाँ ( Power of Duma )

ड्यूमा के पास उसकी शक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला पाई जाती है जिसमें निम्न क्षमताएं शामिल है।

  • कानून को पारित करना ।
  • बजट की स्वीकृति करना ।
  • प्रधानमंत्री एवं अन्य सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी देना।
  • सरकार के सभी कामों पर नजर बनाए रखना।
  • ड्यूमा के पास पावर होती है। कि वह राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग पर कार्रवाई भी कर सकती है।

हालांकि इसके लिए ड्यूमा के पास दो तिहाई बहुमत होने आवश्यक होते हैं।

अधिकतर देखा गया है की ड्यूमा एवं  कार्यकारी शाखा के बीच  कभी-कभी विवाद  जैसी बातें होती रहती है।  तथा बता दें कि राष्ट्रपति के पास ड्यूमा द्वारा पारित कानून को वीटो करने की शक्ति होती है। 

हालांकि जैसा कि मैं आपको पहले बता चुका हूं कि यदि ड्यूमा के पास दो तिहाई बहुमत हो तो वह भी 2 की पावर को ओवरराइड कर सकता है।

तथा ड्यूमा के पास सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी शक्ति प्राप्त होती है।

यदि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है तो सरकार को इसके लिए इस्तीफा भी देना पड़ सकता है।

ड्यूमा की आलोचना ( criticism of the duma )

कई बार लोगों द्वारा आलोचना की गई कि ड्यूमा की कार्यकारी शाखा से उन्हें स्वतंत्रता की कमी महसूस होती है।  इस पर कई आलोचकों का यह भी तर्क है कि  ड्यूमा राष्ट्रपति की नीतियों के लिए आभार इस टाइम से भी कहीं अधिक मान्य रखता है।

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एवं कई बार तो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी चिंता  जताई गई है।  एवं आलोचकों ने सरकार पर सत्तारूढ़ पार्टी की जीत सुनिश्चित करने  के लिए चुनावी प्रक्रिया में हेराफेरी करने का आरोप  भी लगाया है।

आलोचकों द्वारा ड्यूमा  पर  आरोप अक्सर लगाए ही जाते हैं एवं  ड्यूमा भी इन आरोपों को अपने आप पर हटाने से पीछे नहीं छूटती है।

निष्कर्ष ( conclusion )

यदि रूस की राजनीतिक व्यवस्था की बात करें तो ड्यूमा एक महत्वपूर्ण संस्था बताई गई है।

ड्यूमा विभिन्न कार्य को करने के लिए  उत्तरदाई मानी जाती है यहां कानून को पारित करने बजट को मंजूरी देने एवं सरकार की कामों की देखरेख करने तथा  व्यवस्था को बनाए रखने में अहम भूमिका अदा करती है।  हालांकि ड्यूमा का कार्यकारी शाखा के साथ वाद विवाद  अक्सर होता रहता है मगर  हमारे अनुसार यह अपना कार्य अच्छे से निभाती है। एवं आलोचकों का आरोप इस पर यह भी रहता है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ड्यूमा  निष्पक्षता करती है। 

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